है रात सितारों से रौशन
Abhishek Tripathi – Feb 2006
I guess this piece stems from
the feeling of bracing ourselves to leave behind all that we once deeply cared
for in our beloved XL.
I only hope this sentimental creation will instill a cheerful note in our batch, as it has undoubtedly done in me.
Here’s to finding a new meaning for life…
I only hope this sentimental creation will instill a cheerful note in our batch, as it has undoubtedly done in me.
Here’s to finding a new meaning for life…
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सूरज
पे
मतवाली
छायी
अब सांझ ढले तो ढला करे,
है रात सितारों से रौशन
अब चांद छिपे तो छिपा करे ।
अब दिल की धड़कन गूँज रही
पैरों में थिरकन आन बसी,
दिलफेंक ज़माने से कह दो
कोई दर्द उठे तो उठा करे ।
ईंसाफ़ करेगा क्या कोई
अब याद करेगा क्या कोई,
यादें तो मेरी अपनी हैं
कोई भूल चले तो चला करे ।
गीतों की गूँज सुनी मैंने
नैनों की चोट बहुत देखी,
तड़पाती मगर लजाती सी
पलकों की ओट बहुत देखी,
कोई गीत बजे, कोई चोट लगे,
अब प्रीत सहे तो सहा करे,
कोई पलक उठे, कोई नयन चले,
अब खून बहे तो बहा करे।
अब सांझ ढले तो ढला करे,
है रात सितारों से रौशन
अब चांद छिपे तो छिपा करे ।
अब दिल की धड़कन गूँज रही
पैरों में थिरकन आन बसी,
दिलफेंक ज़माने से कह दो
कोई दर्द उठे तो उठा करे ।
ईंसाफ़ करेगा क्या कोई
अब याद करेगा क्या कोई,
यादें तो मेरी अपनी हैं
कोई भूल चले तो चला करे ।
गीतों की गूँज सुनी मैंने
नैनों की चोट बहुत देखी,
तड़पाती मगर लजाती सी
पलकों की ओट बहुत देखी,
कोई गीत बजे, कोई चोट लगे,
अब प्रीत सहे तो सहा करे,
कोई पलक उठे, कोई नयन चले,
अब खून बहे तो बहा करे।
.
नदिया
में
एक
चली
नइया
लहरों की राह बहुत देखी,
अनजान पवन था या शायद
कर दी नदिया ने अनदेखी,
प्यासा पानी में खेल गया
क्या प्यास बुझी, ये कौन कहे,
माझी साहिल पे लौट गया
अब लहर चले तो चला करे ।
लहरों की राह बहुत देखी,
अनजान पवन था या शायद
कर दी नदिया ने अनदेखी,
प्यासा पानी में खेल गया
क्या प्यास बुझी, ये कौन कहे,
माझी साहिल पे लौट गया
अब लहर चले तो चला करे ।
ये खेल पुराना हो ना हो,
हो लबों पे सन्नाटा चाहे
दिल एक निशाना हो ना हो,
अब हवा में खुशबू बागों की
एक फूल गिरे तो गिरा करे,
परवाने का दिल डोल गया
अब शमा जले तो जला करे ।
सूरज पे मतवाली छायी
अब सांझ ढले तो ढला करे,
है रात सितारों से रौशन
अब चांद छिपे तो छिपा करे ।
Comments
chal padi jo shahron ke teere...
abb lahar uthe, yaa lau phadke,
XL ke nazaare chootenge...
Abb daal-daal aur gagan-gagan,
udd chali hai panchi ki toli...
koi nazar uthe, ya aah bhare,
XL ki woh galiyan choontengi...
Koi raah takke, koi deep jale,
mann mein kitni bhi tees uthe...
Par kabhi naa wapas aane ko,
Ye pall abb naata tod chale...
Muskaan lute to luta kare,
kaliyon se woh daaman bhare to kya...
inn mastaano ki toli to,
abb chali yaha, aur chali waha...
-- For my Dear Brother...
You are the best. :)