तेरे जैसी मेरी मंज़िल

Abhishek Tripathi – Oct 2005
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
I wrote this piece down with mixed feelings. It is essentially a parting song that can be used by someone bidding farewell to anyone or anything.
A lover bidding farewell to his beloved or …
An XLer bidding farewell to beloved XLRI
What it means to each of us will be our own choice …
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न वो मंज़र, न वो आलम,
न फिर से वो वफ़ा होगी,
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
न जाने फिर कहॉ होगी ।

खिलेंगे गुल मेरे हमदम
तेरे गुलशन में हर मौसम,
मेरे गुलशन में इठलाती
हवाओं को सजा़ होगी ।
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
न जाने फिर कहॉ होगी ।

लगा मुझको न जाने क्यों
छुपा लूं मैं तुझे दिल में,
हुई मुझसे जो मीठी सी
ख़ता, ये फिर कहॉ होगी ।
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
न जाने फिर कहॉ होगी ।

तेरे हंसते हुये चेहरे
पे बन जायेंगी फिर गज़लें,
मेरे होठों पे गीतों की
निशानी फिर कहॉ होगी ।
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
न जाने फिर कहॉ होगी ।
चलेंगे साथ फिर तेरे
हर इक रस्ते पे दीवाने,
तेरे चलने से रुक जाती
जवानी फिर कहॉ होगी ।
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
न जाने फिर कहॉ होगी ।

छलक जायेंगे पैमाने
भले गुमनाम गलियों में,
किसी की याद में छलकी
निगाहें फिर कहॉ होंगी ।
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
न जाने फिर कहॉ होगी ।

लिखूंगा मौसम-बेमौसम
गज़ल मैं भी नयी कोई,
कलम कहती है अब ऐसी
कहानी, फिर कहॉ होगी ।

न वो मंज़र, न वो आलम,
न फिर से वो वफ़ा होगी,
तेरे जैसी मेरी मंज़िल
न जाने फिर कहॉ होगी ।

* * * * THE END * * * *

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